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Showing posts from February, 2021

शायद इसे ही शुकून कहते है ....!!

ये अकेला मन, ये ख़ाली पन्ने कुछ बारिश की बुँदे, और चाय की चुस्की शायद इसे ही शुकून कहते है ।। ये कूदते ख़याल, ये भटकता दिमाग और इनको चुपचाप निहारता ये स्वभाव शायद इसे ही शुकून .....!! ऊँची पहाड़ी मंजिलें, ये टेढ़ी मेड़ी राहे और इसमें धीरे धीरे  बढ़ते ये कदम शायद इसे ही .............!! यु घबराना, फिर सांसो का चढ़ जाना और मन का सब समज पाना शायद ..................!!

भूख़

ये जीवन की भूख़ ने लड़ा रखा है मेरे दोस्त, वर्ना हमने तो कुत्ते बिल्लियों को भी २ गज की दुरी में चैन  से सोते देखा है।