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पियूष को जाने

नमस्कार दोस्तों,

में हु आपका दोस्त पियूष, जिसे लिखा पंसद है । वैसे तो में अपनी जीविका कंप्यूटर इंजीनियरिंग करके चलता हु, पर मुझे गुमने का पहाड़ो पर सेर करने में बड़ा मजा आता है॥ में अपने फ्री वक्त में कुछ न कुछ अलग अलग चीज़ सीखता रहता हु॥

मुझे आधात्म के बारे में पड़ना और जानना भी बहुत अच्छा लगता है ॥

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शिव सी शांति चाहिए तो कण्ठ मे ज़हर, गले मे विषेला साँप, बगल मे दुर्गा की आग, जटा मे रौद्र गँगा क्या तुम्हें अब भी लगता हे शांति सस्ती है?

भूख़

ये जीवन की भूख़ ने लड़ा रखा है मेरे दोस्त, वर्ना हमने तो कुत्ते बिल्लियों को भी २ गज की दुरी में चैन  से सोते देखा है। 

मन के ख़याल - ४

code तो हम लिखते है जीवन चलाने को। वर्ना मन तो लगता है हमारा जीवन की गहराई जानने को॥