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Showing posts from October, 2020

मन के ख़याल - १

ऐ जिंदगी अभी इतना बड़े भी नहीं की तुझे समझ सके। पर यु समझ की इतने नादाँ भी नहीं की तू चुतिया बना के निकल सके॥

हमारी अधूरी कहानी

एक बार की बात है हमको उनसे और उनको हमसे प्यार हुआ| कुछ अपनों को मनाने की बाते हुई, और इसी दरमिया उनका प्यार थोड़ा गहरा गया । हम समज ना पाए, थोड़ा रुके पर साला इसी मशक्कत में साला देर हो गयी और उन्हें लगा की हम उनके प्यार से मुकर गए  और साला इसी कश्मकश में हमारा प्यार उनसे और बाद गया अब होना क्या था वो हमसे मुकर चुके थे, अब लगे है उनको मनाने में  चलो फिर कभी बतायेगे आगे क्या रंग आता है हमारी कहानी में |

मन का रोना गाना

ऐ मन कितना रोयेगा अब तू अब तो तेरे रुलाने वालो के लिए भी लोग रोने लगे है। कुछ झूम कुछ नाच यु ना वक्त गवा उनके लिए जो कभी तेरे अपने थे ही नही। सुन संभल सुधर देख जरा वो आखे जो कब से तेरे झूमने का रास्ता देख रही। जी कभी उनके लिए जो तेरी ख़ुशी में अपनी ख़ुशी देख रही। क्यों गुजरता है वक्त उनकी फिकर में जिनके लिए तेरी ख़ुशी के मायने ही नही॥ उठ संभल  चल पकड़ अपनी राह बड़ा कदम शायद उस खशी को भी तेरी आस है । क्यों रोता है इन छोटी छोटी कठिनाइयों से ये तो राहो की वो रेत है जो काम आएगी तेरे महलो की कलाओ में। उठ संभल और इकठ्ठा कर इन कठिनाईओ को ये ही है वो जो तेरे महलो का गुण जाएगी। अब महल बनाने में भी इतना न उछल तू, जी ऐसे की जहा भी जाये तू खुशियों के महल बनाये तू। झूम नाच गा खुश रह क्यों की न तुझे पता न मुझे की क्यों आये हम यहा । इतना झूम नाच की एक दिन खुदा आये तेरे पास और कही की ये बन्दे बताता हु की क्यों आया है यह तू ॥

सवाल अपनों की खुशी का

बुरा तो हमें भी लगा, पर क्या करे सवाल अपनो की खुशी का था। अड़ तो हम भी सकते थे, पर क्या करे सवाल अपनों की ख़ुशी का था। सही और गलत में मन मेरा भी उलझा था, क्या होगा क्या नही होगा सवाल मेरे मन में भी था। बहलाया हमने अपने मन को कहकर जो होगा देखा जायेगा। खुद की राहे बनाने का ख्वाब और दम हममे भी था, पर रुक गए। क्यु की सवाल अपनों की ख़ुशी का था॥

अवसाद या प्यार

आवारा हुआ में पागल हुआ, कैसी बीमारी से में घायल हुआ। न दिन में है चैन न रात में आराम, कोई बता दो में इसको कैसे दू विराम॥   आवारा हुआ में पागल हुआ, कैसी बीमारी से में घायल हुआ। न दिल को सुकून न तन को आराम, अरे मन क्यों की तूने नींदे हराम ॥

ख़याल

अजीब हे ये दासता..!! आते है मन को ख़याल बड़े चंगे, करता है मन उनको उतरने को खत पर।   पर देखो ये साला...!! कभी वक्त नही मिलता, कभी दवात नही मिलती और कभी शब्द नहीं मिलते। और जब मिलते है सब तो वो ख़याल नहीं मिलता ॥।