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शिव सी शांति

शिव सी शांति चाहिए तो
कण्ठ मे ज़हर,
गले मे विषेला साँप,
बगल मे दुर्गा की आग,
जटा मे रौद्र गँगा
क्या तुम्हें अब भी लगता हे शांति सस्ती है?

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