Skip to main content

ख़याल

अजीब हे ये दासता..!!

आते है मन को ख़याल बड़े चंगे, करता है मन उनको उतरने को खत पर।

 

पर देखो ये साला...!!

कभी वक्त नही मिलता, कभी दवात नही मिलती और कभी शब्द नहीं मिलते।
और जब मिलते है सब तो वो ख़याल नहीं मिलता ॥।

Comments

Popular posts from this blog

शिव सी शांति

शिव सी शांति चाहिए तो कण्ठ मे ज़हर, गले मे विषेला साँप, बगल मे दुर्गा की आग, जटा मे रौद्र गँगा क्या तुम्हें अब भी लगता हे शांति सस्ती है?

भूख़

ये जीवन की भूख़ ने लड़ा रखा है मेरे दोस्त, वर्ना हमने तो कुत्ते बिल्लियों को भी २ गज की दुरी में चैन  से सोते देखा है।