आवारा हुआ में पागल हुआ, कैसी बीमारी से में घायल हुआ।
न दिन में है चैन न रात में आराम, कोई बता दो में इसको कैसे दू विराम॥
आवारा हुआ में पागल हुआ, कैसी बीमारी से में घायल हुआ।
न दिल को सुकून न तन को आराम, अरे मन क्यों की तूने नींदे हराम ॥
मेने ये ब्लॉग अपने मन के विचारो को लिखने के लिए बनाया है, अगर पसंद आये जरूर कमेंट करके बताये॥
आवारा हुआ में पागल हुआ, कैसी बीमारी से में घायल हुआ।
न दिन में है चैन न रात में आराम, कोई बता दो में इसको कैसे दू विराम॥
आवारा हुआ में पागल हुआ, कैसी बीमारी से में घायल हुआ।
न दिल को सुकून न तन को आराम, अरे मन क्यों की तूने नींदे हराम ॥
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