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अवसाद या प्यार

आवारा हुआ में पागल हुआ, कैसी बीमारी से में घायल हुआ।
न दिन में है चैन न रात में आराम, कोई बता दो में इसको कैसे दू विराम॥
 

आवारा हुआ में पागल हुआ, कैसी बीमारी से में घायल हुआ।
न दिल को सुकून न तन को आराम, अरे मन क्यों की तूने नींदे हराम ॥

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सवाल अपनों की खुशी का

बुरा तो हमें भी लगा, पर क्या करे सवाल अपनो की खुशी का था। अड़ तो हम भी सकते थे, पर क्या करे सवाल अपनों की ख़ुशी का था। सही और गलत में मन मेरा भी उलझा था, क्या होगा क्या नही होगा सवाल मेरे मन में भी था। बहलाया हमने अपने मन को कहकर जो होगा देखा जायेगा। खुद की राहे बनाने का ख्वाब और दम हममे भी था, पर रुक गए। क्यु की सवाल अपनों की ख़ुशी का था॥