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मन के ख़याल - १

ऐ जिंदगी अभी इतना बड़े भी नहीं की तुझे समझ सके।
पर यु समझ की इतने नादाँ भी नहीं की तू चुतिया बना के निकल सके॥

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शिव सी शांति

शिव सी शांति चाहिए तो कण्ठ मे ज़हर, गले मे विषेला साँप, बगल मे दुर्गा की आग, जटा मे रौद्र गँगा क्या तुम्हें अब भी लगता हे शांति सस्ती है?

भूख़

ये जीवन की भूख़ ने लड़ा रखा है मेरे दोस्त, वर्ना हमने तो कुत्ते बिल्लियों को भी २ गज की दुरी में चैन  से सोते देखा है।