दिल खोल के जीना सीख लो जनाब
क्या पता कभी जनाजा उठ जाये
और ख़याल बस मन में रह जाये ॥
शिव सी शांति चाहिए तो कण्ठ मे ज़हर, गले मे विषेला साँप, बगल मे दुर्गा की आग, जटा मे रौद्र गँगा क्या तुम्हें अब भी लगता हे शांति सस्ती है?
मेने ये ब्लॉग अपने मन के विचारो को लिखने के लिए बनाया है, अगर पसंद आये जरूर कमेंट करके बताये॥
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