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सवाल अपनों की खुशी का

बुरा तो हमें भी लगा, पर क्या करे सवाल अपनो की खुशी का था।

अड़ तो हम भी सकते थे, पर क्या करे सवाल अपनों की ख़ुशी का था।

सही और गलत में मन मेरा भी उलझा था, क्या होगा क्या नही होगा सवाल मेरे मन में भी था।

बहलाया हमने अपने मन को कहकर जो होगा देखा जायेगा।

खुद की राहे बनाने का ख्वाब और दम हममे भी था, पर रुक गए।


क्यु की सवाल अपनों की ख़ुशी का था॥


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