Skip to main content

Depression एक रोग

यु तो बड़े खुश थे हम अपनी जिंदगी से पर कुछ रोग ऐसे लगे की ख़ुशी मायने बदल गए।

हॅसते हॅसते इन आँखो से ढेरो आसु छलक गए ।

ना देखा था हमने जिंदगी का ऐसा मोड़

क्या कहु इस मोड़ क बारे में, बड़े लड़ते लड़खड़ाते सँभलते चल रहे थे हम रास्तो में

और अचानक ऐसे टकराये की साला संभलना भूल गए।

और हुआ यु की इन आसुओ की छलछलाहट में हम हसना भूल गए ।
 

और इसी बीच हमने खटखटाये चिकित्स्कों के दरवाज़े तो पता चला की हम तो साला लड़ना भूल गए। 

और साला लड़ाई इस बार और बड़ी थी, लड़ना उससे है जो आपको लड़ने में मदद करता है (मन)।

और कहु इस बारे में तो जनाब इस बारे में खाना पीना और कभी कभी तो जीना भी दुशवार हो जाता है।

 

हारे है जनाब पर लड़ना नहीं छोड़ा अब जाना है की लड़ाई तगड़ी है, 

होंगे और थोड़ा तैयार लड़ेंगे इससे भी और आएंगे फिर उन बचे हुए जीवन के रास्तो पर

अगर कभी टकराये जनाब आपसे तो मिलेंगे हॅसते मुस्कुराते उन्ही बचे हुए रास्तो पर॥

Comments

Popular posts from this blog

सवाल अपनों की खुशी का

बुरा तो हमें भी लगा, पर क्या करे सवाल अपनो की खुशी का था। अड़ तो हम भी सकते थे, पर क्या करे सवाल अपनों की ख़ुशी का था। सही और गलत में मन मेरा भी उलझा था, क्या होगा क्या नही होगा सवाल मेरे मन में भी था। बहलाया हमने अपने मन को कहकर जो होगा देखा जायेगा। खुद की राहे बनाने का ख्वाब और दम हममे भी था, पर रुक गए। क्यु की सवाल अपनों की ख़ुशी का था॥