यु तो बड़े खुश थे हम अपनी जिंदगी से पर कुछ रोग ऐसे लगे की ख़ुशी मायने बदल गए। हॅसते हॅसते इन आँखो से ढेरो आसु छलक गए । ना देखा था हमने जिंदगी का ऐसा मोड़ क्या कहु इस मोड़ क बारे में, बड़े लड़ते लड़खड़ाते सँभलते चल रहे थे हम रास्तो में और अचानक ऐसे टकराये की साला संभलना भूल गए। और हुआ यु की इन आसुओ की छलछलाहट में हम हसना भूल गए । और इसी बीच हमने खटखटाये चिकित्स्कों के दरवाज़े तो पता चला की हम तो साला लड़ना भूल गए। और साला लड़ाई इस बार और बड़ी थी, लड़ना उससे है जो आपको लड़ने में मदद करता है (मन)। और कहु इस बारे में तो जनाब इस बारे में खाना पीना और कभी कभी तो जीना भी दुशवार हो जाता है। हारे है जनाब पर लड़ना नहीं छोड़ा अब जाना है की लड़ाई तगड़ी है, होंगे और थोड़ा तैयार लड़ेंगे इससे भी और आएंगे फिर उन बचे हुए जीवन के रास्तो पर अगर कभी टकराये जनाब आपसे तो मिलेंगे हॅसते मुस्कुराते उन्ही बचे हुए रास्तो पर॥