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Depression एक रोग

यु तो बड़े खुश थे हम अपनी जिंदगी से पर कुछ रोग ऐसे लगे की ख़ुशी मायने बदल गए। हॅसते हॅसते इन आँखो से ढेरो आसु छलक गए । ना देखा था हमने जिंदगी का ऐसा मोड़ क्या कहु इस मोड़ क बारे में, बड़े लड़ते लड़खड़ाते सँभलते चल रहे थे हम रास्तो में और अचानक ऐसे टकराये की साला संभलना भूल गए। और हुआ यु की इन आसुओ की छलछलाहट में हम हसना भूल गए ।   और इसी बीच हमने खटखटाये चिकित्स्कों के दरवाज़े तो पता चला की हम तो साला लड़ना भूल गए।  और साला लड़ाई इस बार और बड़ी थी, लड़ना उससे है जो आपको लड़ने में मदद करता है (मन)। और कहु इस बारे में तो जनाब इस बारे में खाना पीना और कभी कभी तो जीना भी दुशवार हो जाता है।   हारे है जनाब पर लड़ना नहीं छोड़ा अब जाना है की लड़ाई तगड़ी है,  होंगे और थोड़ा तैयार लड़ेंगे इससे भी और आएंगे फिर उन बचे हुए जीवन के रास्तो पर अगर कभी टकराये जनाब आपसे तो मिलेंगे हॅसते मुस्कुराते उन्ही बचे हुए रास्तो पर॥

मन के ख़याल - १

ऐ जिंदगी अभी इतना बड़े भी नहीं की तुझे समझ सके। पर यु समझ की इतने नादाँ भी नहीं की तू चुतिया बना के निकल सके॥

हमारी अधूरी कहानी

एक बार की बात है हमको उनसे और उनको हमसे प्यार हुआ| कुछ अपनों को मनाने की बाते हुई, और इसी दरमिया उनका प्यार थोड़ा गहरा गया । हम समज ना पाए, थोड़ा रुके पर साला इसी मशक्कत में साला देर हो गयी और उन्हें लगा की हम उनके प्यार से मुकर गए  और साला इसी कश्मकश में हमारा प्यार उनसे और बाद गया अब होना क्या था वो हमसे मुकर चुके थे, अब लगे है उनको मनाने में  चलो फिर कभी बतायेगे आगे क्या रंग आता है हमारी कहानी में |

मन का रोना गाना

ऐ मन कितना रोयेगा अब तू अब तो तेरे रुलाने वालो के लिए भी लोग रोने लगे है। कुछ झूम कुछ नाच यु ना वक्त गवा उनके लिए जो कभी तेरे अपने थे ही नही। सुन संभल सुधर देख जरा वो आखे जो कब से तेरे झूमने का रास्ता देख रही। जी कभी उनके लिए जो तेरी ख़ुशी में अपनी ख़ुशी देख रही। क्यों गुजरता है वक्त उनकी फिकर में जिनके लिए तेरी ख़ुशी के मायने ही नही॥ उठ संभल  चल पकड़ अपनी राह बड़ा कदम शायद उस खशी को भी तेरी आस है । क्यों रोता है इन छोटी छोटी कठिनाइयों से ये तो राहो की वो रेत है जो काम आएगी तेरे महलो की कलाओ में। उठ संभल और इकठ्ठा कर इन कठिनाईओ को ये ही है वो जो तेरे महलो का गुण जाएगी। अब महल बनाने में भी इतना न उछल तू, जी ऐसे की जहा भी जाये तू खुशियों के महल बनाये तू। झूम नाच गा खुश रह क्यों की न तुझे पता न मुझे की क्यों आये हम यहा । इतना झूम नाच की एक दिन खुदा आये तेरे पास और कही की ये बन्दे बताता हु की क्यों आया है यह तू ॥